भगवान भाव के भूखे हैं, प्रसाद के नहीं : हरि शरण महाराज
अजमेर। भगवान भाव के भूखे हैं प्रसाद के नहीं, मनुष्य को निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करनी चाहिए क्योंकि संसार सेवा से ही चलता है। वह भगवान उसी से प्रसन्न होते हैं जो दूसरों की सेवा निस्वार्थ भाव से करता है। यह बात कथावाचक हरि शरण महाराज ने शास्त्री नगर स्थित भक्त प्रहलाद पार्क […]
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