अनूठी परंपरा : बाघसुरी गांव के घरों में सन्नाटा, खेतों पर बनीं रसोई

नाहरपुरा में खेत पर बासासूण परंपरा का निर्वहन करते ग्रामीण परिवार।

इंद्र देव व देवरी माता के भोग लगाकर मनाया बासासूण
बाघसूरी। नसीराबाद के समीपवर्ती बाघसूरी, नाहरपुरा सहित आसपास के गांवों में भगवान इंद्र देव व देवरी माता को प्रसन्न रखने के लिए सावन के महीने में बरसों से बासासूण की अनूठी परंपरा चली आ रही है। इस दिन ग्रामीण घरों पर ताला लगाकर अपने खेतों की ओर निकल जाते हैं तथा खेत पर ही रसोई बनती है। दूर दराज तक के रिश्तेदारों, परिचितों, मेहमानों को आमंत्रित किया जाता है।

रविवार को बाघसुरी, न्यारा समेत आस पास के गांवों में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। बाजार नहीं खुले। अलसुबह ही रसोई बनाने की सामग्री लेकर परिवार समेत ग्रामीण खेत, खलिहान, बाडों, कुओं, बावडियों पर पहुंच गए। इस बार अच्छी बारिश हुई, तालाब व जलाशय लबालब हो गए हैं।

बाघसूरी में बासासूण के दौरान जगंल में दाल बाटी चूरमा बनाता ग्रामीण परिवार।

इस खुशी में दाल, बाटी, चूरमा आदि बनाकर भगवान इंद्र देव, देवरी माता एवं अपने देवी देवताओं के भोग लगाकर उन्हें प्रसन्न किया। पंडित जगदीश प्रसाद व पुरूषोत्तम प्रसाद ने बताया कि बाघसूरी में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। जिससे भगवान इंद्र देव व देवरी माता का आशीर्वाद किसानों, पशुपालकों व ग्रामीणों पर सदैव बना रहता है।

नाहरपुरा गांव के वयोवृद्ध भारू भडाणा ने बताया कि बासासूण परंपरा के हर सावन के महीने में निभाई जाती है। सभी अपने घरों से बाहर निकल जाते हैं तथा खेतों पर ही खाना बनाया बनाया जाता है। खासकर चूरमा, दाल बाटी बनाते हैं तथा मिलने जुलने वालों को भी जीमणे को बुलाते हैं। इन्द्र भगवान से हमेशा अच्छी बारिश करने की कामना करते हैं।

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