अजमेर दरगाह में नीम का पुराना पेड़ धराशायी

अजमेर। राजस्थान के अजमेर स्थित महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में आज तड़के एक नीम का पेड़ धराशायी हो गया। गनीमत यह रही कि जब यह पेड़ धराशायी हुआ तब तड़के अंधेरे का समय होने से किसी की जान का नुकसान नहीं हुआ।
दरगाह सूत्रों के अनुसार सुबह अचानक आए अंधड़ के चलते दरगाह बुलंद दरवाजे के पास गेट नंबर दो दवाखाने के समीप वाला करीब 80 साल पुराना नीम का पेड़ जड़ सहित उखड़ गया। पेड़ के जड़ से उखड़ने के कारण लगती हुई गफ्फार फूल वाले की दुकान को नुकसान पहुंचा लेकर वहां भीड़भाड़ नहीं होने से कोई जनहानि नहीं हुई।
घटना की सूचना के बाद दरगाह कमेटी से जुड़े कारिंदे मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। गनीमत रही कि पेड़ गिरने के हादसे में किसी की जान नहीं गई लेकिन आसपास स्थित दुकानों को नुकसान अवश्य पहुंचा जिसका आकलन किया जाना शेष है। पेड़ गिरने का हादसा ढाई से चार बजे के बीच हुआ बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यह पेड़ प्रदेश के तत्कालीन वन मंत्री गोविंद सिंह गुर्जर के हाथों रोपित किया गया था और वर्तमान में पूरी मजबूती के साथ खड़ा था। जहां यह पेड़ था उसके पास ही बुलंद दरवाजे पर सालाना उर्स के मौके पर प्रधानमंत्री से लेकर अन्य राजनेताओं की चादर के साथ संदेश पढ़ने का सिलसिला बना रहता है और इस क्षेत्र में दिनभर अकीदतमंद एवं जायरीनों की आवाजाही बनी रहती है।
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